नाड़ी शोधन प्राणायाम: वैकल्पिक नासिका श्वास की पूरी विधि
Nadi Shodhana Pranayama: Complete Guide in Hindi
✍️ लेखक
Yogacharya R. Goswami
प्राणायाम एवं विज्ञान भैरव तंत्र के आचार्य · 25+ वर्ष अनुभव · 1.8M+ साधक
नाड़ी शोधन — "नाड़ी" अर्थात ऊर्जा चैनल, "शोधन" अर्थात शुद्धि। यह ऊर्जा नाड़ियों को शुद्ध करने वाला प्राणायाम है।
इसे अनुलोम-विलोम भी कहते हैं। यह मन और शरीर में संतुलन बनाने का सबसे प्रभावशाली और सुरक्षित तरीका है।
नाड़ी शोधन कैसे करें: पूरी विधि
- बैठें: रीढ़ सीधी रखें। दाहिने हाथ को नासिका मुद्रा में लाएं: तर्जनी और मध्यमा को मोड़ें, अंगूठा और अनामिका उपयोग में आएंगे।
- दाहिनी नासिका बंद करें (अंगूठे से) और बाईं से धीरे-धीरे सांस अंदर लें — 4 तक गिनें।
- दोनों नासिका बंद करें — 4 तक रोकें (या जितना आरामदायक हो)।
- बाईं नासिका बंद करें (अनामिका से) और दाईं से धीरे-धीरे छोड़ें — 8 तक गिनें।
- अब दाईं से अंदर लें — 4 तक।
- दोनों बंद — 4 तक।
- बाईं से छोड़ें — 8 तक।
- यह एक चक्र पूरा हुआ। 10 चक्र से शुरू करें।
नाड़ी शोधन के फायदे
- चिंता, तनाव, घबराहट में तुरंत राहत
- मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित होते हैं
- रक्तचाप सामान्य रहता है
- एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है
- नींद की गुणवत्ता में सुधार
- हार्मोनल संतुलन
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नाड़ी शोधन और अनुलोम विलोम में क्या फर्क है?
दोनों लगभग एक ही हैं। अनुलोम-विलोम सरल है (बिना कुम्भक के), नाड़ी शोधन में सांस रोकना (कुम्भक) शामिल है। शुरुआती लोग अनुलोम-विलोम से शुरू करें।
क्या नाड़ी शोधन रोज करना चाहिए?
हाँ — रोज 10-15 मिनट नाड़ी शोधन एक महीने में जीवन बदल देता है। यह उन लोगों के लिए आदर्श है जो चिंता, तनाव, या अनिद्रा से परेशान हैं।
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